Babita ki chudai

मेरे मुंबई वाले फ्लेट में एक नोकरानी काम करती थी. उसका नाम बबिता था. उम्र करीब ३६ साल होगी. उसके बूब्स बड़े बड़े थे. जब वो चलती थी तो उसके बूब्स हिलते रहते थे उसे देखते ही मेरा लंड खड़ा हो जाता था. में हर दम सोचता रहता था की इसे केसे चोदा जाए.
आखिर एक दिन मुझे मौका मिल ही गया. एक दिन में घर पर था तो मेने बबिता को आवाज दी कोई जवाब ना पा कर मेने सोचा की वो घर चली गई होगी. में थका हुआ था इस लिए अपने कपडे उतार कर में नहाने के लिए बाथरूम में घुसा बाथरूम में घुसते ही मेने देखा की बबिता नहा रही थी. उसके बदन पर एक दाग तक नहीं था. वो पूरी नंगी थी उसकी पीठ मेरी तरफ थी इस लिए उसने मुझे नहीं देखा.
शायद सोचा होगा की इस वक्त कौन आएगा. इस लिए शायद बाथरूम का दरवाजा बंद नहीं किया. मेने सोच लिए आज तो इसे जरूर चोदुंगा. मेने चुपके से उसके सारे कपडे उठाये और बहार आ गया. और द्रोइंग रूम में बेठ गया. थोड़ी देर बाद उसका चेहरा बाथरूम के दरवाजे से झांकता दिखाई दिया. वोह बोली साहब मेरे कपडे दे दीजिये. मेने कहा खुद आकर ले लो. वोह अपने बूब्स को दोनों हाथो से धक् कर बहार आई. मेरे सामने एक लड़की बगेर कपड़ो के खड़ी थी. ये देख कर मेरा लंड तन कर खड़ा हो गया.
मेने कहा तुम बहुत सुन्दर हो. बबिता. वो शर्मा गयी. मेरी हिम्मत बढ़ी और में खड़ा हो गया. खड़े होते ही मेरा लंड और तन गया. और मेरा ९ इंच का लंड देख कर उसकी आँखे फेल गयी. में उसके पास गया और और उसके होठो को चूमने लगा. पहले तो उसने विरोध किया लेकिन फिर वो भी मेरा पूरा साथ देने लगी. फिर मेने लिप्स को छुआ और निचे आकार उसके बूब्स को चूसने लगा फिर मेने उसे बाहों में उठाया और बेड रूम में ले गया. बेड पर लिटा कर मेने उसके लेग्स को फेलाया और उसकी चूत चाटने लगा. उसकी चूत मक्खन की तरह चिकनी थी. मेने उसकी ब्रा में अपनी दो फिंगर घुसाई और अन्दर बहार करने लगा. वो गरम हो रही थी.
वो बेताबी में अपने हाथो से अपने चुचियो को मसलने लगी. उसके मुह से आआआह्ह्ह ऊउह्ह्ह और करो फाड़ दो मेरी चूत. सुन कर मेरा जोश बढ़ गया. मेने अपना लंड उसके मुह में डाल दिया. वो उसे लोली पॉप की तरह चूसने लगी. और मेने उसकी चूत को जी भर कर चूसा. अब हम ६९ पोजीशन में थे. फिर मेने उससे कहा बबिता अब में तुम्हारे बुर को फाडुगा. वो तो पहले से तैयार थी.
उसने कहा हां साब अब इस बुर को फाड़ दो अब और रहा नहीं जाता. फिर मेने अपना लंड उसके बुर के मुह पर रख्खा और धक्का दिया. लंड थोडा अन्दर गया की वो चीखने लगी उठी आह धीरे करो दर्द होता हे. लेकिन मेने उसकी बात अनसुनी कर अपना काम जारी रख्खा.
लंड पूरा घुसते ही वो छिपकली की तरह मेरे साइन से चिपक गई. फिर मेने अपना लंड तेजी से उसकी चूत के अन्दर बहार करने लगा मेने उसे कास कास कर चोदा. वो भी गांड उछाल उछाल कर मेरा पूरा साथ दे रही थी. बहुत देर तक चोदने के बाद में उसके बुर में जहर गया. और उसके सिन पर सर रख कर सो गया. थोड़ी देर बाद मेने उसकी चुचियो के बिच अपना लंड रख्खा और उसकी चुचियो को चोदने लगा. थोड़ी देर में मेरा लंड फिर तैयार था. अब मेने उसे डौगी स्टाइल में बिठाया और कहा बबिता अब में तुम्हारी गांड मारूंगा.
वो डर गयी बोली नहीं साब गांड मत फादो बहुत दर्द होगा. आपका लंड बहुत मोटा हे. मेने उसे संजय की पहले थोडा दर्द होगा लेकिन फिर बहुत मज़ा आएगा. वो तैयार हो गयी. मेने उसकी गांड के अन्दर बहार वेसलिन माली और लंड घुसाने लगा. लंड थोडा अन्दर गया की वो दर्द से छटपटाने लगी. और छूटने की कोसिस करनी लगी. पर मेने उसको पकड़ा और धक्के लगाता रहा. वो रोने लगी और मेरा लंड उसकी गांड को रोंद्ता रहा.
थोड़ी देर बाद उसे भी मज़ा आने लगा और वो आराम से चुदवाने लगी. काफी देर तक चोदने के बाद में उसकी गांड में झर गया. फिर मेने पूछा क्यों बबिता मज़ा आया…? वो बोली हां साब बहुत मज़ा आया आप बहुत अच्छा चोदते हो अब में रोज़! ! ! ! आपसे ही चुदवाउंगी. फिर तो हम लोग रोज़ ही चुदाई का मज़ा लेने लगे.

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