Hindi Adult Kahani

हिंदी एडल्ट स्टोरीज़ : New Hindi Adult Kahani – Sex Stories

हिंदी एडल्ट स्टोरीज़ : New Free Hindi Adult Kahani

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हेल्लो दोस्तों, मैं रजनीश, ये मेरी पहली और सच्ची कहानी है। जीवन में अचानक से ना चाहते हुए भी ऐसी घटनाएं इतिफाक से हो जाता है। अब मै सीधा कहानी पर आता हूं।।

मैं बिहार के नवादा जिले से हैं। मेरे घर में 5 लोग हैं, मम्मी,पापा,2 बड़ी बहन और मैं। पापा सरकारी कर्मचारी हैं, मेरी बड़ी बहन का नाम मनीषा है, उम्र 26 साल, ग्रेजुएशन 2015 में फाइनल हो चुका है।

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छोटी दीदी का नाम स्वीटी है, उम्र -24साल, रंग -गोरा, कद-5फुट 2 इंच, ग्रेजुएशन पिछ्ले साल फाइनल हो चुका है। मेरा नाम रजनीश पटेल है,मैं बिहार शरीफ में रूम लेकर बही पढ़ता हूं ग्रेजुएशन 2nd ईयर में हूं, उम्र-21साल, साधारण कद-काठी वाले मै एक गोरा नौजवान लड़का हूं।

ये कहानी मेरे और स्वीटी दीदी की है जब स्वीटी दीदी Rrb ग्रुप d का एग्जाम 02/11/2018 को देने जा रही थी उनका सेंटर कोलकाता में 2nd shift दिया था पापा को छुट्टी नहीं रहने के कारण मुझे साथ में जाना था। स्लीपर कोच का 2टिकट 01/11/2018 के डेट में दीदी बोली टिकट लेने के लिए मैं डबल स्लीपर वर्थ का एक टिकट लिया।

शाम में गाड़ी था जब घर से निकले उस समय दीदी रेड सूट और लैंगिंग पहनी थी बहुत खूबसूरत लग और सेक्सी लग रही थी। गाड़ी पर जाने तक मुझे दीदी के लिए बुरा खयाल मेरे मन में नहीं था। लेकिन वर्थ पर दीदी को पहले गई और लेट गई।कुछ देर बाद गाड़ी खुल गई तो मैं वर्थ पर चढ़ा दीदी बोली खिड़की साइड तुम सो जाओ मैं बैसा ही किया। अब हल्की रोशनी आ रही थी वर्थ में क्योंकि उसमें पर्दा लगा हुआ था उसको ठीक से बैग रख कर चाप दिया था क्योंकी हवा से उड़ ना सके। अब अंदर से खिड़की हल्की सी खोल दिया हवा आने के लिए। दीदी दुपट्टा हटा कर सोई हुई थी। हल्की रोशनी और ऊपर से हल्की ठंडी हवा दीदी उस ड्रेस में काफी जच रही थी हल्का बूब्स का उभार, बोले तो सेक्सी लग रही थी। उस समय मैं नाइक का ट्राउजर और शर्ट पहने थे।

कुछ देर बाद उसने मुझे खिड़की बंद करने को बोली मैं उसे बेडसिट बैग से निकाल के दिया फिर ओढ़ कर सो गई। लेकिन इतना सब होने के बाद उनके साथ सोने से दीदी के प्रति मेरे दिमाग में गलत विचार उत्पन होने लगा इस कारण से मेरा लौड़ा भी खड़ा हो चुका था।

पर डर के कारण कुछ कर नहीं सकते थे।

कुछ देर बाद मैं खिड़की को बंद कर दिय और बेडसीट बड़ा रहने के कारण दोनों उसी में सो गए दीदी पहले से बेडशीट के अंदर थी इस कारण से दीदी का जिस्म गर्म था तब तक हम दीदी से हट कर सो रहे थे लेकिन अब भी मेरा अन्तरबासना बढ़ता ही जा रहा था। अब मुझ से रहा नहीं जा रहा था तभी मैंने सोच लिया कि होगा जो देखा जाए गा और मै धीरे धीरे दीदी से सट गए ।

तब मै दीदी की तरफ करवट लेकर सोया था तभी दीदी ने अपनी पैर मोड़ ली और मेरा लौड़ा दीदी के कमर के नीचे जांघ में टच हो रहा था क्योंकी बस गति में होने के कारण हम सब हिल रहे थे। दीदी पर्दे के साइड करवट लिए थी। फिर मुझे कब आंख लग गई पता ही नही चला। उस समय लगभग 11:00 बजा होगा।

फिर मुझे नींद खुली तो मोबाइल पर देखा 1:07 बज रहा था और दीदी मेरे तरफ करवट ली हुई थी उनका एक पैर मेरे ऊपर था मैं अपने एक हाथ से दीदी के जांघ से घुटना तक लैंगिंग के ऊपर से ही हाथ फेरने लगा इससे मेरा लौड़ा फिर से सख्त खड़ा हो गया। कुछ देर बाद वो जाग गई तो मैं उनके जांघ पर से अपना हाथ हटा लिया। लेकिन मेरा लौड़ा फिर से खड़ा था तो दीदी अपना पैर मेरे पैर पर से हटाने लगी तो उन्होंने अपने पैर को पहले थोड़ा ऊपर की उस दौरान उनका जांघ मेरे लौड़ा से टकरा गई तो इस बार उन्हें भी अहसास हुआ लेकिन इसका किसी तरह का कोई असर नहीं दिखाई जैसे कुछ हुआ ही नहीं।

फिर 1:30 बजे एक लाइन होटल (ढाबा) के पास गाड़ी रुकी और बोला पर पेशाब या चाय किसी को अपना काम सब कर लीजिए क्योंकी गाड़ी फिर नहीं रुकेगी।

अब पूरी पैसेंजर उतर चुका था, दीदी हम सब लोग लेकिन महिला को पेशाब करने की कोई जगह नही था सभी जगह पुरुष ही था। दीदी धीरे से बोली सभी जगह पुरुष ही भरा है फिर मैं उन्हें होटल के पीछे जाने को कहा उधर पुरा अंधेरा था तो दीदी मोबाइल जला कर गई मैं भी दीदी से थोड़ा दूर पर पेशाब करने लगा लेकिन दीदी पेशाब करते समय लाइट बन्द कर ली।

फिर मैंने चाय के लिए पूछा तो हा में सीर हिलाई ।

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होटल में चाय पीने के बाद अपने सीट पर चली गई। मैं 2बजे गाड़ी चलने के बाद सीट पर जाने लगा तो जैसे ही ऊपर चढ़ा बस जोर से हिल तो मैं जान बुझ कर दीदी के ऊपर गिर पड़े और मेरा लौड़ा खड़ा होने के कारण उनके पेट पर टकरा गया।

दीदी बोली – कैसे चड़ता है,तुझे आज हो क्या गया है।

मैं – हम क्या करें जो होना चाहि वो तो हो ही नहीं रहा।

दीदी – क्या नहीं हो रहा( इस बात को सझते मुस्कुराती हुई)

मैं- कुछ नहीं। (अब मै बेडशीट के अंदर लेट गए)

दीदी कुछ नहीं बोली

मैं दीदी के पैर में अपने पैर को रगड़ते हुए कहा बहुत ठंड लग रहा है। तो दीदी पैर पीछे खींचते हुए बोली ठंड सिर्फ तुझे लग रही है मुझे नहीं।

मैं- तुझ में क्या आग लगी हुई है जो ठंड नहीं लग रही।

दीदी- आग लगी हुई है तुझ में फिर भी तुम्हें ठंड लग रहा है। (मतलब दीदी अच्छी तरह से बातो को समझ- बूझ रही थी)

मैं- मुस्कुराते हुए कहा कि मुझ में आग लगी है तो बुझा दो।(दोनों आपस में धीरे धीरे से बात कर रहे थे)
दीदी- शरमाते हुए थोड़ा गुसा में तुम्हारा मतलब हम नहीं समझ रहे हैं क्या कोई बहन से ऐसे बात करता है।
मैं- सब समझ रही है तो छेड़ क्यो रही थी।

दीदी- मैं कहा छेड़ रहा हूं, मैं कुछ बोली हूं मैं तो तेरे सवाल का जवाब दे रहा हूं।

मैं- तुम बोल भी क्या सकती है सब तेरी बजग से हुआ है, तुम जबाब ही दे सकती और कुछ नहीं।

दीदी- मेरी बजह से कैसे।

मैं- आज इस ड्रेस में काफी सेक्सी लग रही है और मै तेरे साथ में ही सोया हूं इसलिए ऐसा हो रहा है।

दीदी- कोई अपनी बहन के बारे में ऐसा सोचता है क्या।

मैं- तो मेरी क्या गलती है तुम हो ही इतनी खूबसरत। दीदी- खूबसरत हू इसमें मेरी क्या गलती है।

मैं- इसी लिए तो मेरे साथ ऐसा हुआ, सच में दीदी आज तुम बहुत हॉट लग रही है।

दीदी- पहले जैसे ही तो मै आज भी तैयार हुई हूं।
मैं- वो तो आप पहले से ही तैयार हैं लेकिन पता नहीं आज प्यार हो गया है।
दीदी- प्यार हो गया है या कुछ और हो रहा है।
मैं- हा, वो ही
दीदी- तो वो बर्दास्त करो अपनी गर्ल फ्रेंड के साथ कर लेना।
मैं- मेरी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है।
दीदी- क्यों, कोई पटी नहीं आज तक शहर में तो सब के गर्ल फ्रेंड होते हैं।
मैं- आज तक कोई ऐसी मिली नहीं और कोशिश भी नहीं किए।
दीदी- क्यों ( अब हम दोनों खुल कर बात करने लगे थे)
मैं- सोचता हूं पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाएगा और डर भी लगता है।
दीदी- ये तो है, मतलब अब तक किसी के साथ कुछ नहीं किया।
मैं- नहीं तो, तुम की है किसी के साथ।
दीदी- हा, लेकिन सिर्फ बात
मैं- किससे, दीदी-कोचिंग में मेरा एक बॉयफ्रेंड था पहले उसी के साथ।
मैं- अब बात नहीं होती हैं, दीदी- नहीं, उससे ब्रेक अप हो गया था।
मैं- सिर्फ बात, उसने कभी कुछ करने के लिए नहीं बोला,
दीदी- हा बोलता था लेकिन कभी मौका नहीं मिला और घर- समाज से डर भी लगता था की कोई देख लेगा तो क्या कहेगा इसलिए सिर्फ टाइम पास करते थे।
मैं- तो आपको कभी मन करता है।
दीदी- करता है तो क्या करें।
मैं- मन तो मुझे भी करता था लेकिन कभी मौका नहीं मिला आज क्यों न हम दोनों अपनी आग को बुझा ले।
दीदी- नहीं हम दोनों भाई-बहन हैं ऐसा नहीं कर सकते।
मैं- हम दोनों क्या किसी के साथ भी नहीं कर सकते लोगों के साथ मौका नहीं मिलेगा डर भी लगेगा , अब डर भी नहीं और मौका भी मिल रहा है तो भाई बहन हैं।
दीदी- घर में या किसी को कुछ पता चल जाएगा तो।
मैं- दोनों के अलाबा कोई नहीं जानेगा, हम दोनों भाई बहन हैं तो सक भी नहीं करेगा और किसिसे डरने की जरूरत भी नहीं।
दीदी- घर पर, मैं- घर पर संभल कर रहेगें।
दीदी- ठीक है, लेकिन अभी नहीं। मैं- क्यों,
दीदी- सुना है पहली बार दर्द होता है और बस में ठीक नहीं।
मैं- ये भी ठीक है लेकिन अभी आग लगी है जो।
दीदी- कन्ट्रोल करो

लेकिन मुझ से रहा नहीं जा रहा था तो मैं झट से दीदी के उपर चढ़ गया और उनके होंठ पर अपना होंठ रख कर लीप किस करने लगा और मैं एक हाथ कपड़ा के उपर से पेट पर, अपने पैर से भी उनके पैरों को सहलाता रहा दीदी भी मेरा साथ देने लगी उन्होंने अपनी हाथ से मेरे पीठ सहला रही थी। 5 मिनट बाद दीदी के गाल, होंट, गर्दन सभी जगह पर किस कर रहा था और कपड़ा के ऊपर अपने हाथ से कभी बूब्स, जांघ, पेट और गान्ड के कूल्हे को सहला, दबा रहा था।

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लगभग 10-12 मिनट बाद दीदी मुझे धकेल कर अलग कर दी।
मैं- क्या हुआ, दीदी- मेरा कपड़ा खराब हो जाएगा निकलने वाला है।
मैं- दूसरा बदल लेना, दीदी- एग्जाम के बाद कहीं बदलेंगे।
मैं- ठीक है लेकिन मेरा माल तो निकलने दे।
दीदी- तुम खुद निकाल लो नहीं तो मेरा हाथ खराब हो जाएगा।
मैं- नहीं तो आपका कपड़ा और नहीं हाथ गंदा होगा माल निकलने वाला को होगा तो बता दीजिए गा।
दीदी बोली ठीक है करलो अपनी मनमानी।

उसके बाद फिर से मै दीदी को और सहलाने लगा फिर दीदी के लैगिंग को जांघ तक खिसका दिया, क्या आश्चर्य जनक नजारा था काले रंग की पैंटी पहनी थी पैंटी के ऊपर से ही दीदी की चूत को सहलाता मसलता रहा। कुछ देर बाद पैंटी को भी नीचे उतार दिया क्या फुली और गोरी त्वचा बाली गुलाबी बुर थी उस पर हल्की फुल्की मुलायम झांटे थी ऐसा लग रहा था बिलकुल टाईट कसी हुई चूत थी, इधर मेरे लंड को सहला कर दीदी बुरा हाल कर दि थी मेरा माल निकलने वाला था इसलिए अपने रूमाल को बैग से निकाल कर अपना वीर्य पोछा, थोड़ी देर बाद दीदी भी वीर्य छोड़ दी दीदी के चूत को भी साफ किया। मेरा पूरा रूमाल भीग चुका था दीदी उसे फेकने को बोली तो मैं खिड़की से फेक दिया। अब दोनों भाई बहन ठंडा हो गए थे।

उस समय 3:23 बज रहा था फिर दोनों एक दूसरे से लिपट कर सो गए, सुबह आंख खुली तो दीदी मुझ से लिपटी हुई थी कुछ देर बाद दीदी भी जाग गई। उस समय 5:19 बजा था फिर 10 मिनट बाद बस स्टॉप पर हमलोग उतर गए। उसके बाद एक सौचलाय में फ्रेश होकर होटल में नाश्ता किया इसी तरह समय पता ही नहीं चला 2 बजे तक जैसे तैसे दिन बीत गया।

एग्जाम के बाद दीदी आज ही घर निकल जाते हैं लेकिन बस में एग्जाम और दीपावली के कारण सिट नहीं मिला तो मैंने दीदी को समझाया कल जाने के लिए।(क्यों की दीवाली के कारण ट्रेन में भी काफी भीड़ थी) तो अगले दिन शाम का टिकट बस में एक ही कंपार्टमेंट 2 स्लीपर ले लिय, घर पर पापा को फोन करके बता दिया।
अब रात गुजारने के लिए पास के एक होटल में अगले दिन शाम तक बुक कर लिया, जिसमें एक रूम दो बेड था, दोनों की आईडी प्रूफ पर पापा का नाम एक ही रहने से उसे पता चल गया और बताए की दोनों भाई बहन हैं।

फिर होटल में स्नान किये दोनों और घूमने के लिए निकल गए और दोनों शाम को 8 बजे भोजन करके लौट रहे थे तो रास्ते में दीदी बोली आज रात का क्या इरादा है तेरा।
मैं- इरादा तो खराब है लेकीन अभी तक कन्ट्रोल में हूं।
दीदी- ओह… ऐसा है, मतलब कभी भी out of control हो सकता है। मैं- क्यों, कोई बात है।
दीदी- अभी तो कोई बात नहीं लेकिन सुरक्षा कबच नहीं लिया तो गड़बड़ बात हो सकती है।

सुरक्षा कवच मतलब हम समझ गए थे तो मैं दीदी को बोला ठीक है,मेडिकल स्टोर दिखे तो बताना। कुछ दूरी पर एक दवाखाना दिखा वहां से 1 पैकेट मैनफोर्स का कॉन्डम,2 पीस आईपिल और एक रिभाईटल का सीसी लेकर, होटल में आ गए। उस समय 8:38 बज रहे थे।

फिर क्या था दोनों होटल के कमरे में जाते ही मैंने गेट की कुण्डी लगा दी और दीदी को पीछे से हाग और गर्दन पर से दुपट्टा हटा कर किस करने लगा। तो दीदी बोली आराम से कर आज रात तो तेरा ही है। तब मै छोड़ दिया और दोनों वाथरूम से फ्रेश होकर आए।

फिर दोनों एक ही बिस्तर पर लेट गए और मैं दीदी के हाेंट में होंठ लगा कर उसे लीप किस करने लगा, हाथ से उनहें पूरी तरह जकड़े हुए थे फिर कपड़ा के ऊपर से कभी चूची, पेट , जांघ, बुर, गान्ड के कूल्हे को सहला और दबा रहा था। उधर मेरे लंड को भी दीदी पुरी तरह

सहला कर मजे ले रही थी। अब हम दोनों पूरी तरह तैयार हो चुके थे लेकिन मै दीदी को तड़पा के चोदना चाहता था। इसलिए सिर्फ दीदी के लैंगिंग को उतार कर अलग कर दिया इस बार वह भुरा रंग की पैंटी पहनी थी।
फिर मैं अपना कपड़ा और दीदी अपनी शूट उतार रही थी अब मैं अंडरवियर, शॉर्ट्स में और दीदी ब्रा, पैंटी में थी फिर से मै दीदी के पुरी जिस्म को सहला ने लगा और दीदी मेरी जांघ को। अब दीदी से बर्दास्त नहीं हो रहा था वो धीरे धीरे उफ़ आह….. की आवाज निकाल और चोदने को बोल रही थी इधर मैं झड़ ने बाला था तो वाथरूम में झड़ आए। अब भी दीदी नहीं झड़ी थी तो मैं उसे फिर से सहलाने लगा और ब्रा को खोल कर बूब्स को चूसने दवाने लगा और हांथ से चूत के दरार में दाने को रगड़, मसल रहा था। कुछ देर बाद दीदी बोली मेरा पानी निकलने वाला है और माड़ जैसा गाढ़ा सफेद पानी निकलने लगा। अब दीदी ठंडा हो गई थी इस समय 9:56 बजा था लेकिन इतने देर में मेरा लंड फिर से खड़ा हो गया था। अब मैं दीदी की योनि में ऊंगली घुसा रहा था तो चूत बहुत टाइट होने की वजह से दर्द हो रहा था। तो मैं उनकी चूत के दरार में उंगली फिराने लगा कभी कभी दाने को भी मसल दे रहे थे फिर मैं बूब्स को भी चूसने लगे। अब दीदी फिर से गर्म होने लगी और कहने लगी अब मुझे जादा मत तड़पा इस बार अपने लंड को डाल दें, मेरी चूत का सिल तोड़ दे।
मैं अपना बनियान उतार दिया अब दोनों पूरा नंगे हो चुके थे।

मेरा लन्ड भी काफी सख्त हो गया था अब मैं भी दीदी को ज्यादा तड़पाना ठीक नहीं समझा और मैं दीदी के ऊपर चढ़ गया उनके पैरों के बीच में आए फिर टांगो को फैला दिया अब मैंने लंड को पकड़ कर चूत की दरार में ऊपर नीचे फेरने लगा तो चूत की पानी से लंड भी गीला हो गया और दीदी की गुलाबी चूत कामरस की वजह से चमक रहा था।

अब मेरा 2इंच मोटा,6इंच लम्बा का लन्ड दीदी की योनि में प्रवेश के लिए तैयार था, अब दीदी अपने हाथों से चूत की दरार को फैला दी और मैं दीदी की योनि में लिंग घुसा रहा था लेकिन दीदी की योनि काफी टाईट होने से उनको दर्द हो रहा था तो मैं उन्हें चूत फैलाने के लिए बोला और इस बार मै लिंग को चूत के निशान पर सेट किया और एक शॉर्ट मारा तो चिकना के कारण लिंग फिसल गया।
दूसरे बार में दीदी लिंग को पकड़ के योनि में सेट की और मैं दीदी की कमर को पकड़ कर जोर दिया तो इस बार सुपाड़ा अन्दर घुसा की दीदी को चीख निकल गई।
(मैं समझ गया की दीदी को दर्द हो रहा और अगले धके में सील टूट जाती इसलिए अपना होंठ दीदी के होंठ पर रख कर लीप कर लिया)

अगले शॉर्ट में मेरा लन्ड 3इंच घुस गया जिससे दीदी कराह उठी और गिड़गिड़ाने लगी, इसलिए सिर्फ लीप किस करने लगा थोड़ी देर बाद दीदी बोली दर्द कम हुआ,तो मैं दीदी की लीप लॉक कर के जोर सेअगला शॉर्ट भी लगा दिया जिससे हल्की चीख निकली, मेरा 6 इंच पूरा का पूरा लिंग घुस गया, इस बार दीदी हिल गई उसके आँख से आंसू निकल आया लन्ड चूत में कसा हुआ था।

दीदी- ऊ आह ई उफ………. की आवाज निकाल रही थी और लंड को निकालने के लिए बोल रही थी तो कुछ देर बाद जब दर्द कम हुआ तो लंड को निकाला उस पर सील टूटी थी जो खून से लथपथ लाल, चूत भी थी।
मैंने लंड को फिर से चूत पर रखा और जोर का धक्का दिया जिससे फिर से पुरा लंड भी घुस गया और दीदी की चीख भी निकली। दर्द के कारण कुछ देर रूक गए तो दर्द कम होने के बाद दीदी धक्का लगाया मैं समझ गया की दर्द कम गया। फिर क्या था दोनों तरफ आग लगी हुई थी धीरे धीरे शॉर्ट लगाने लगे दीदी भी पुरा साथ दे रही थी कुछ देर बाद चोदाई का गति बढ़ा दिया। अब दोनों पूरी तरह जकड़े हुए आग में जल रहे थे,इसलिए दीदी मौन कर रही थी।

दीदी- अः आह आह आह…. ई… इ ..ओ उफ …उई मां मर गई रे… इस तरह की आवाज निकाल रही थी।
कुछ देर बाद दीदी जोर-जोर से जल्दी-जल्दी चोदने के लिए बोल रही थी, मैं समझ गया की दीदी झड़ने वाली है तो मै पुरी स्पीड में चोदने लगा,7-8 धक्का के बाद दीदी झड़ गई। जिससे लिंग योनि में ढीला पड़ गया और जीतने बार लिंग योनि में अन्दर बाहर कर रहे थे उतनी बार आवाज निकल रही थी। झड़ने के बाद भी चोदने से अब दीदी कस मसा रही थी और मैं नहीं झड़ने के कारण उन्हें चुदाई का लम्बा लम्बा शॉर्ट लगा रहा था,10-12 शॉर्ट मारने के बाद लगा मै भी झड़ने वाला हूं।

अब दीदी भी अकड़ गई थी कुछ ही देर में मैं दीदी की योनि में ही झड़ गया फिर दीदी भी दोबारा झड़ गई।
उनकी चूत में से हम दोनों के गर्म वीर्य का मिश्रण का धारा निकल रहा था।
अब दीदी निढाल होकर पड़ी रही हम भी उनके ऊपर ही निढाल हो गए।

इस समय 11:13 बजा था, लगभग डेढ़ घंटे चुदाई चली। थोड़ी देर बाद मैं और दीदी वॉथरूम में फ्रेश हुए और कपड़ा पहन कर दीदी को गर्वनिरोधक गोली (आई पिल) दी फिर दोनों रिवाइटल के गोली खा लिए।
दीदी को पता था की रिवाइटल खाने से शरीर का थकान ठीक हो जाता है।
तो दीदी बोली सुबह 4 बजे का अलार्म लगाने को

मैं- क्यों, दीदी- सुबह फिर से चुदाई करेगे और सो जायेंगे फिर जब उठेगे फ्रेश होकर कहीं घूमने चलेगे।
मैं- ठीक है, फिर बस में।

दीदी- बस में जो तुम चाहो।

मैं- कैसा लगा चुदाई कर के।

दीदी- बहुत दर्द हुआ लेकिन मजा आ गया, तुम सही कहता था इससे अच्छा मौका नहीं मिल सकता था और तुम्हारे साथ जीतना मजा आया और किसी के साथ नहीं आता।

मैं- दीदी लेकिन घर पर मौका नहीं मिलेगा।

दीदी- क्यू, मै- आप मनीषा दीदी के साथ सोते हैं।

दीदी- वो सब हो जाए गा। कल तक अपना टाइम है फिर देखा जाए गा। मैं- ठीक है।
फिर सो गए दोनों।

जब सुबह 4 बजे अलार्म बजने लगा तो उठे दीदी भी सो रही थी। उन्हें जगाया और फिर से दोनों एक घंटा जबरदस्त तरीके से चुदाई किया और फिर सोए तो सुबह 8 बजे उठे तो नहा धो कर फ्रेश हुए और घूमने चले गए उधर ही नस्ता किया।

उधर से घूम कर 2 बजे लौटे और एक बार फिर से चुदाई किए। फिर फ्रेश होकर 3:30 बजे होटल खाली कर दिये और फिर बैग लेकर घूमने चले गए उधर से ही बस स्टॉप पर हमलोग पहुंच गए।

रात में बस पर सो गए जब एक बजे दीदी की आंख खुली तो मुझे जगाई और दोनों मिल कर एक दूसरे से लिपट गए फिर लिप किस करने लगे तभी अचानक कुछ देर बाद गाड़ी रूक गई।

फिर पता चला 15 मिनट का स्टॉप है पेशाब करने के लिए। हम दोनों भी पेशाब करने चल पड़े लेकिन दीदी को पेशाब करने की जगह नही थी सभी जगह पुरुष ही भरा था। तब मैंने उसे थोड़ा दूर बायपास रोड पर लेकर गया, दीदी मेरे सामने ही पेशाब की। फिर 15 मिनट बाद बस खुल गई।

अब हम दोनों भाई बहन फिर से किस करने लगे तभी दीदी ने मेरे ट्राउजर में हाथ डाल कर मेरे लंड को मसलने लगी और मैं उनकी चूत को। इस तरह से हम दोनों एक बार फिर चुदाई की दीदी की चूत फुल कर लाल हो गया था। लेकिन दर्द कम गया था रिवाइटल खाने के कारण लेकिन चलती बस में चुदाई का मजा ही कुछ और था ।

आगे की कहानी अगला पार्ट में तब तक के लिए अलविदा।।

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